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दोस्तों यदि आप शेयर मार्किट में निवेश करते है या शेयर मार्किट में निवेश करने में इच्छुक है तो आपने सेंसेक्स के बारे में जरूर सुना होगा क्युकि  
Sensex शेयर मार्किट से जुड़ा हुआ होता है। और आपको Sensex के बारे में न्यूज़ पेपर और न्यूज़ चैनल में जरूर देखने को मिल जाता है क्युकि वहां अक्सर हमे सुनने को मिलता है कि सेंसेक्स इतने अंक घटा और इतने अंक बढ़ा। आज की हमारी पोस्ट इसी विषय पर आधारित है क्युकि आज हम बात करने वाले है कि सेंसेक्स क्या होता है,  

ये कैसे काम करता है, Sensex कैसे घटता या बढ़ता है, ये घटता-बढ़ता क्यों रहता है,  
सेंसेक्स का आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है, Sensex के फायदे क्या होते है और इसमें सम्मलित top 30 companies कौन सी है लेकिन आज की ये पोस्ट शुरू करने से पहले मैं आपसे अनुरोध करता हु  
कि इस पोस्ट को पढ़ने से पहले हमारी पिछली पोस्ट को जरूर पढ़े जिससे आपको आज की पोस्ट को समझने में बहुत आसानी होगी और इससे आपको शेयर मार्किट में भी बहुत मदद मिलेगी। तो चलिए शुरू करते है।

सेंसेक्स क्या होता है [Sensex in Hindi]

BSE SENSEX अच्छी तरह से स्थापित और वित्तीय रूप से 30 अच्छी कंपनियों का free float market weighted या स्टॉक मार्किट इंडेक्स होता है  
ये कम्पनियाँ BSE में लिस्टेड होती है और इन्हे "Blue-chip" कंपनियों के नाम से भी जाना जाता है ये 30 companies इस प्रकार चुनी जाती है जो ट्रेडिंग में बहुत ज्यादा एक्टिव और बड़ी होती है ये भारत में उपस्थित किसी भी उद्योग से जुडी हो सकती है

S & P BSE SENSEX की भारत में शुरुआत 1 जनवरी 1986 को हुई और आज ये कहना गलत नहीं होगा कि ये आज घरेलू शेयर बाजारों की नब्ज बन गयी है 
SENSEX का Full market capitalization 07 फरवरी 2020 तक 1,76,112.3149 बिलियन (US $1 ट्रिलियन) (GDP का 37%) था।  
जबकि इसका Free-flow market capitalization 43,272,852 बिलियन (US $607 बिलियन) था। जो कि अपने आप में बहुत बड़ी बात है।

1989 शेयर मार्किट के एक्सपर्ट दीपक मोहोनी द्वारा SENSEX शब्द बनाया गया था। जो कि सेंसिटिव और इंडेक्स दो शब्दों से मिल कर बना है 
जो एक संवेदी सूचिकांक है और उस समय ये लगभग 750 अंक पर था।

SENSEX के जरिये हम उसमे लिस्टेड कंपनियों की जानकरी आसानी से प्राप्त कर सकते है। जानकारी का मतलब ये है  
कि उन कंपनियों में होने वाली हानि और लाभ के बारे में भी जानकारी प्राप्त सकते है। सेंसेक्स भारत का सबसे पुराना स्टॉक मार्किट इंडेक्स है 
ये NIFTY से भी पुराना है। लेकिन दोनों में तुलना की जाये तो Sensex की तुलना में निफ़्टी ज्यादा famous है।

जैसा आपको पता चल गया होगा कि Sensex का क्या काम होता है:- इसका काम होता है इसमें लिस्टेड कंपनियों की जानकारी रखना। 
इसकी मदद से आप इन कंपनियों की जानकरी एक जगह और आसानी से प्राप्त करके अपना अगला कदम बढ़ा सकते हो। इन कंपनियों में इतनी ताकत होती है कि ये भारतीय कंपनियों में एक trend सेट कर सकती है।

सेंसेक्स कैसे बनता है

जैसे आपको पता चल गया होगा कि S & P BSE SENSEX या सेंसेक्स BSE [Bombay Stock Exchange] का हिस्सा होता है ठीक उसी तरह जिस प्रकार निफ़्टी NSE [National Stock Exchange] का हिस्सा होता है। 
SENSEX 30 कंपनियों से मिलकर बना होता है जब कि NIFTY 50 कंपनियों से मिलकर बना होता है। इनमे उपस्थित कंपनियां समय समय पर बदलती रहती है।
SENSEX में उपस्थित कंपनियां BSE द्वारा बदली जाती है जबकि NIFTY में उपस्थित कंपनियां NSE द्वारा बदली जाती है इन कंपनियों को बदलने के लिए एक विशेष प्रकार की स्टॉक एक्सचेंज की Index committee बैठक होती है 
जिसमे ये निर्णय लिया जाता है कि किस कंपनी को इसमें शामिल किया जाये और किस कंपनी को हटाया जाये।

सेंसेक्स में कंपनियों के चुनने की प्रक्रिया

जैसा कि मैंने आपको बताया कि इन कंपनियों को चुनने या बदलने के लिए एक कमेटी बनाई जाती है और ये कमेटी Stock exchange के द्वारा बनाई जाती है  
इस बैठक में देश के कई प्रोफेशनल लोगो को शामिल किया जाता है। जिसमे अर्थशास्त्री, प्रबंधक, सरकार तथा बैंको के लोग भी शामिल होते है।  
ये बैठक महीने में एक बार होती है। सभी के वोट एक जैसे गिने जाते है यहाँ तक कि Director का वोट भी एक सामान गिना जाता है

टॉप 30 में शामिल होने के लिए कंपनी में निम्न चीजे जरूर होनी चाहिए।

कंपनी के शेयर्स का प्रतिदिन ख़रीदा और बेचा जाना जरुरी होता है।
हर दिन की औसत ट्रेड संख्या और वैल्यू के हिसाब से वो कंपनी देश की सबसे बड़ी 150 कंपनियों में जरूर शामिल होनी चाहिए
कंपनी का Free-float Market Capitalisation Weightage अच्छा होना चाहिए।
कंपनी कम से कम एक साल के लिए शेयर बाजार में रेजिस्ट्रड होनी चाहिए।

    TOP 30 कम्पनियाँ कौन सी है


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    सेंसेक्स कैसे घटता या बढ़ता है

    जैसा मैंने आपको अपनी पिछली पोस्ट में बताया था कि निफ़्टी कैसे घटता या बढ़ता है ठीक उसी प्रकार SENSEX भी घटता या बढ़ता है।  
    Sensex में लिस्टेड कोई कंपनी अपने पर्सनल बिज़नेस में यदि अच्छा प्रदर्शन करती है तो जाहिर सी बात है कि उस कंपनी को लाभ होगा और कंपनी की वैल्यू बढ़ जाएगी।  
    यदि Sensex में लिस्टेड उस कंपनी की कीमत बढ़ेगी तो जिसका फायदा सेंसेक्स को भी मिलेगा क्युकि वो कंपनी Sensex में लिस्टेड है

    और सेंसेक्स में आपको बढ़त देखने को मिलेगी ठीक इसी प्रकार सेंसेक्स में लिस्टेड कोई कंपनी अपने पर्सनल बिज़नेस में यदि ख़राब प्रदर्शन करती है तो जाहिर सी बात है कि उस कंपनी को हानि होगी।
    और कंपनी की वैल्यू घट जाएगी। यदि SENSEX में लिस्टेड उस कंपनी की कीमत घटेगी तो जिसका नुकसान सेंसेक्स को भी होगा और सेंसेक्स में आपको गिरावट देखने को मिलेगी इस प्रकार सेंसेक्स घटता या बढ़ता है

    Sensex का आपके जीवन पर क्या प्रभाव होता है

    अब तो आप  ये समझ गए होने कि Sensex में देश की टॉप 30 कंपनी लिस्टेड होती है और ये कंपनी अपने अपने क्षेत्र की सबसे बड़ी कम्पनियाँ होती है यहाँ पर बड़ी कम्पनियाँ से मतलब है कि ये काफी ताकतवर और मार्किट कैप के हिसाब से बहुत बड़ी होती है.

    इन कंपनियों की ब्रांच या इनका कारोबार पुरे देश में फैला होता है जिनमे बहुत से लोग काम करते है और इन कंपनियों द्वारा दी जा रही सेवाएं लोगो द्वारा बहुत प्रयोग में भी ली जाती है यदि इन कंपनियों को नुकसान होता है

    तो जाहिर सी बात है इसका नुकसान आपको भी कही न कही होगा और यदि इन कंपनियों को फायदा होगा तो इसका फायदा आपको भी जरूर होगा। 
    क्युकि इन कंपनियों को नुकसान होने होने पर आम लोगो की नौकरी भी जा सकती है, इनकी सेवाओं में भी कमी देखने को मिलेगी 
    और यदि इन कंपनियों को लाभ होता है तो ये और ज्यादा लोगो को रोजगार देगी, इनकी सेवाओं में भी बढ़त देखने को मिलेगी।

    Sensex के फायदे

    Sensex के कुछ निम्न फायदे है जिससे आम लोगो को भी फायदा मिलता है
    SENSEX में लिस्टेड कोई कंपनी अपने पर्सनल बिज़नेस में यदि अच्छा प्रदर्शन करती है तो जाहिर सी बात है कि उस कंपनी को लाभ होगा और कंपनी की वैल्यू बढ़ जाएगी। 
    यदि Sensex में लिस्टेड उस कंपनी की कीमत बढ़ेगी तो जिसका फायदा सेंसेक्स को भी मिलेगा क्युकि वो कंपनी सेंसेक्स में लिस्टेड है और Sensex में आपको बढ़त देखने को मिलेगी। 
    अगर Sensex में बढ़त होती है तो Company को फायदा होगा, और जब Company को फायदा होगा  तो Shares खरीदने वालों की संख्या भी बढ़ेगी 
    जिससे Company के Shares के भाव भी बढ़ जाते है जिससे Company को globally फायदा होगा।
    जब शेयर मार्किट अपने उच्त्तम स्तर पर होता है तो उसमे शेयर खरीदने के लिए विदेशी निवेशक भी इच्छुक होते है जिससे हमारी करेंसी को फायदा होता है 
    और हमारा "रुपया" विदेशी Currency की तुलना में मजबूत हो जाता है
    SENSEX के बढ़ने से उन लोगो को फायदा होता है जिसने शेयर को ख़रीदा होता है। मतलब इससे कि आम लोगो को फायदा पहुँचता है। 
    यदि आप लोगो को फायदा पहुंचेगा तो इससे देश की अर्थव्यवस्था में भी सुधार देखने को मिल जाता है।
    यदि आप इस क्षेत्र में नए है तो पहले इस क्षेत्र के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर ले फिर निवेश करे। क्युकि ये जोखिमों के अधीन है।

    Sensex को कैसे Calculate किया जाता है।

    Sensex को Calculate करने के लिए आधार वर्ष 1978-1979 चुना गया है उस समय SENSEX का आधार मूल्य: सिर्फ 100 रुपये था। उस समय भारित बाजार पूंजीकरण Method का उपयोग किया गया था 
    लेकिन 1 सितम्बर 2003 के बाद से Free Float Method से Sensex का Calculation किया जाने लगा है। दुनिया भर के सभी प्रमुख सूचकांक Free Float Method का उपयोग करते हैं।

    Free Float Method का मतलब क्या है?

    फ्री-फ्लोट कंपनी द्वारा जारी किए गए कुल शेयरों का प्रतिशत होता है जो बाजार में व्यापार के लिए आसानी से उपलब्ध होता हैं। इसमें Promoters, government आदि द्वारा रखे गए शेयरों को शामिल नहीं किया जाता है।

    उदाहरण के लिए: यदि किसी कंपनी के कुल 100 शेयर हैं, जिनमें से 39% Promoters, government आदि के पास हैं और 61% शेयर आम जनता के लिए उपलब्ध हैं। ये 60 शेयर-फ्री-फ्लोटिंग ’शेयर हैं और फ्री फ्लोट प्रतिशत 61% या 0.61 होगा।

    Market capitalisation का क्या मतलब है?

    Market capitalisation [बाजार पूंजीकरण] एक कंपनी के मूल्यांकन का प्रतिनिधित्व करता है। यह उस कंपनी द्वारा जारी किए गए शेयरों की संख्या के साथ उनके शेयरों की कीमत को गुणा करके निर्धारित किया जाता है। 
    बाजार पूंजीकरण = मूल्य × मात्रा 
    [Market capitalisation = price × quantity]

    Free float factor के साथ कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन को गुणा करके Free-float market capitalization निर्धारित किया जाता है।

    BSE मुक्त फ्लोट के प्रतिशत के आधार पर फ्री-फ्लोट कारक निर्धारित करता है। नि: शुल्क फ्लोट प्रतिशत 5 से अधिक के उच्च स्तर तक गोल है।

    उपर्युक्त दृष्टांत के साथ जारी रखने के लिए, फ़्लोट प्रतिशत 61% या 0.61 है। इसलिए, फ्री फ्लोट फैक्टर 0.65 है
    तो, मुक्त-फ्लोट बाजार पूंजीकरण = बाजार पूंजीकरण × मुक्त फ्लोट कारक 
    [Free-Float Market capitalisation = Market capitalisation × Free float factor]

    Conclusion [निष्कर्ष]
    दोस्तों आज हमने बात कि सेंसेक्स क्या होता है [Sensex in Hindi], ये कैसे बनता है, SENSEX में कंपनियों के चुनने की प्रक्रिया, ये कैसे घटता या बढ़ता है, सेंसेक्स का आपके जीवन पर क्या प्रभाव होता है, इसके क्या फायदे होते है, SENSEX को कैसे Calculate किया जाता है, Free float method का मतलब क्या है?, Market capitalisation [बाजार पूंजीकरण] का क्या मतलब है?

    उम्मीद करते है आज की ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी यदि आपको इससे कुछ सिखने को मिला है तो हमे कमेंट करके जरूर बताये और इसे शेयर जरूर करे। यदि आपके मन में सेंसेक्स को लेकर अब भी कोई सवाल है तो हमे कमेंट करके जरूर बताये।

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